भारत से बच्चा गोद ले पाएंगे ऑस्ट्रेलिया के नागरिक?

ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स राज्य के विंडसर शहर में रहने वाली 33 साल की एलिज़ाबेथ ब्रूक और उनके 32 वर्षीय पति एडम ब्रूक इस बात से बेहद खुश हैं कि ऑस्ट्रेलिया ने भारत के साथ अडॉप्शन प्रोग्राम (गोद लेने का कार्यक्रम) दोबारा शुरू करने की सिफ़ारिश की है.

एलिज़ाबेथ जब 14 साल की थीं तब उन्हें पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम हो गया था. इस बीमारी की वजह से एलिज़ाबेथ कभी गर्भधारण नहीं कर सकतीं.

वे कहती हैं, ”इस कार्यक्रम ने हमारे लिए उम्मीद की एक नई किरण जगाई है, हम अपना परिवार शुरू करने के बारे में सोच रहे हैं.”

यह एक इत्तेफ़ाक ही है कि जब एलिज़ाबेथ को अपने प्रजनन के बारे में जानकारी मिली, उसी समय उन्होंने टीवी पर बॉलीवुड फ़िल्म राजा हिंदुस्तानी देखी थी.

एलिज़ाबेथ कहती हैं, ”उस फ़िल्म ने मेरे दिमाग में भारत की एक अलग ही छवि बना दी. मुझे भारतीय खाना, कपड़े और फ़िल्में पसंद आने लगा. उसके बाद मैं अपनी बहन के साथ भारत गई, फिर अपने पति एडम के साथ भी दो बार भारत गई. हमने तय किया था कि हम भारत से एक बच्चा गोद लेंगे.”

अक्टूबर 2010 में ऑस्ट्रेलिया ने भारत के साथ चलने वाले अडॉप्शन प्रोग्राम पर रोक लगा दी थी. दरअसल उस समय ऐसे आरोप लगे थे कि इस इंटर-कंट्री अडॉप्शन प्रोग्राम के तहत बच्चों की तस्करी हो रही है. इस तस्करी के पीछे भारत की कुछ जानी मानी कंपनियों का नाम सामने आया था.

इसके बाद भारत ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 और अडॉप्शन रेग्युलेशन 2017 के तहत भारत में दूसरे देशों के नागरिकों के लिए बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया में सख्त कर दिया.

कार्यक्रम शुरू होने में अभी वक़्त

एलिज़ाबेथ का परिवार काफ़ी उदार विचारधारा वाला रहा है और वे अलग-अलग संस्कृतियों और धर्मों के बीच बड़ी हुई हैं. एलिज़ाबेथ कहती हैं, ”ऑस्ट्रेलिया में भारत का बच्चा गोद लेने वाला कार्यक्रम शायद इस साल के अंत तक शुरू हो जाए, अगर सबकुछ ठीक से होता है तो आने वाले तीन साल में हमारे पास बच्चा होगा.”

ऑस्ट्रेलियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ हेल्थ एंड वेलफ़ेयर (एआईएचडब्ल्यू) की 2016-17 की रिपोर्ट के अनुसार किसी जोड़े के लिए दूसरे देश का बच्चा गोद लेने में औसतन 2 साल 9 महीने तक का वक़्त लगता है.

एलिज़ाबेथ और एडम ने भारत की सेंट्रल अडॉप्शन रिसोर्स ऑथोरिटी (सीएआरए) की तत्काल प्लेसमेंट श्रेणी के तहत दो या तीन बच्चों को गोद लेने के बारे में सोचा है.

वैसे तो ऑस्ट्रेलिया-भारत इंटरकंट्री अडॉप्शन प्रोग्राम दोबारा शुरू होने को है लेकिन इस बीच ऑस्ट्रेलिया में सोशल सर्विस विभाग के प्रवक्ता ने बताया है कि इस कार्यक्रम के तहत अभी कोई अपील दर्ज़ नहीं की जा रही है.

प्रवक्ता के अनुसार, ”फिलहाल ऑस्ट्रेलियाई प्रशासन को इस कार्यक्रम को दोबारा शुरू करने के लिए एक नई प्रक्रिया का गठन करना होगा, इसमें अभी थोड़ा वक़्त लगेगा. तभी भारत के पास यहां से बच्चा गोद लेने के आवेदनों को भेजा जा सकेगा. कोई भी कार्यक्रम जिसे दोबारा शुरू किया जाता है उस पर प्रशासन अपनी कड़ी नज़र रखता है ताकि कहीं कोई गड़बड़ी ना हो जाए.”

मां बनने की उम्मीद

भारत से बच्चा गोद लेने वाले इस कार्यक्रम के दोबारा शुरू होने का फ़ायदा ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के नागरिकों को भी मिलने की उम्मीद है.

42 साल की जॉयलक्ष्मी और उनके पति मंजीत सिंह सैनी ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में रहते हैं. जॉयलक्ष्मी और मंजीत पिछले 8 साल से इस कार्यक्रम के दोबारा शुरू होने का इंतज़ार कर रहे हैं.

जॉयलक्ष्मी को साल 2008 में एंडोमीट्रियोसिस ऑपरेशन करवाना पड़ा था, इसी वजह से वो अब गर्भधारण नहीं कर सकतीं.

जॉयलक्ष्मी कहती हैं कि वे फ़िलहाल यह सोच रही हैं कि ऑस्ट्रेलिया में ही स्थानीय जगह से बच्चा गोद लें या फिर भारत के साथ शुरू होने वाले अडॉप्शन कार्यक्रम के तहत भारतीय बच्चे को गोद लें.

जॉयलक्ष्मी ने मां बनने के लिए सरोगेसी का रास्ता भी अपनाया लेकिन वे इसमें सफल नहीं हो पाईं.

जॉयलक्ष्मी कहती हैं, ”हमारे लिए बच्चा गोद लेना ही आख़िरी रास्ता है, साल 2010 में हम भारत से दो बच्चों को गोद लेना चाहते थे लेकिन फिर भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच इंटरकंट्री अडॉप्शन प्रोग्राम रोक दिया गया.”

अनाथालयों बच्चों की ख़राब स्थिति

मैरी जोन्स (बदला हुआ नाम) एक सिंगल मदर हैं. वे क्वींसलैंड के एक दूरस्त इलाक़े में रहती हैं.

अडॉप्शन कार्यक्रम के दोबारा शुरू होने पर मैरी कहती हैं, ”यह बहुत ही अच्छी ख़बर है लेकिन अभी हमें इसके शुरू होने का इंतज़ार करना होगा. मेरा 9 साल का बेटा है, वह यहां खुद को बहुत ही अकेला महसूस करता है, इसीलिए मैं भारत की एक लड़की को पिछले चार साल से गोद लेने पर विचार कर रही हूं.”

मैरी अपने पति के साथ भारत से न्यूज़ीलैंड आ गई थीं. पांच साल पहले वे अपने पति से अलग होकर ऑस्ट्रेलिया चली गईं.

मैरी एक नर्स हैं और जब वे भारत में थीं तो उन्होंने बेंगलुरू के एक अनाथालय में बच्चों की दुर्दशा देखी थी. वे चाहती थी कि कम से कम एक भारतीय बच्चे को गोद लेकर उसे अच्छी ज़िंदगी दें.

अडॉप्ट चेंज नामक एक ग़ैरलाभकारी संस्था की मुख्य कार्यकारी अधिकारी रेनी कार्टर कहती हैं कि अनाथालयों में रहने वाले बच्चों के साथ दुर्वय्वहार होने के कई सबूत मिले हैं.

रेनी कार्टर इस बारे में विस्तार से बताती हैं, ”बच्चा गोद देने के मामले में सबसे पहले यही कोशिश होती है कि उसे देश के भीतर ही किसी परिवार को गोद दिया जाए, हालांकि अगर किसी बच्चे को दूसरे देश के परिवार में गोद दिया जा रहा है तो यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि यह पूरी प्रक्रिया सुरक्षित, पारदर्शी और सही तरीके से हो जिससे बच्चे को अच्छा माहौल और परिवार मिल सके.

एआईएचडब्ल्यू की रिपोर्ट के अनुसार साल 2016-17 के दौरान ऑस्ट्रेलिया में सभी 69 हुए इंटर-कंट्री अडॉप्शन एशिया के देशों से ही हुए. इन देशों में ताइवान से सबसे ज़्यादा हुए, इसके अलावा फिलिपींस, दक्षिण कोरिया और थाईलैंड से भी बच्चों को गोद लिया गया.

English Translation: Adoption

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